भारत में महिलाओं की सुरक्षा आज भी एक गंभीर सामाजिक और कानूनी चुनौती बनी हुई है। दुष्कर्म (Rape) के मामलों को लेकर समय-समय पर देशभर में चिंता जताई जाती रही है। सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, हर वर्ष हजारों दुष्कर्म के मामले दर्ज किए जाते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक दबाव, डर और कलंक के कारण कई मामले दर्ज ही नहीं हो पाते।

उपलब्ध NCRB ‘Crime in India 2023’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में देशभर में लगभग 31 हजार से अधिक दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए। यह औसतन प्रतिदिन 80 से अधिक और लगभग हर 18 मिनट में एक दर्ज मामले के बराबर है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि अधिकांश मामलों में आरोपी पीड़िता का परिचित, रिश्तेदार, पड़ोसी या जान-पहचान का व्यक्ति होता है। यानी ऐसे अपराध केवल अजनबियों द्वारा ही नहीं, बल्कि कई बार भरोसे के दायरे के भीतर भी होते हैं।
सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून, फास्ट ट्रैक अदालतें, महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर और विभिन्न जागरूकता अभियान शुरू किए हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं। महिलाओं के प्रति सम्मान, लैंगिक समानता, त्वरित न्याय और सामाजिक जागरूकता जैसे पहलुओं पर भी समान रूप से काम करने की आवश्यकता है।
दुष्कर्म जैसे अपराध केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। अपराध रोकने के लिए सरकार, न्यायपालिका, पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों और समाज सभी की साझा जिम्मेदारी है। महिलाओं और बच्चियों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना देश की प्राथमिकता होनी चाहिए।