
उत्तरदायित्व (Accountability) यह शब्द आजकल खूब सुर्खियों में है। आखिर क्यों? इसका वास्तविक अर्थ क्या है? सीजेपी (CJP) और छात्र आंदोलनों के बीच यह शब्द काफी प्रचलित हो रहा है, और उनकी प्रमुख मांग भी केवल Accountability की है। आखिर यह Accountability है क्या? हालाँकि, किसी भी शब्द का वास्तविक अर्थ उसके गर्भ में छिपा होता है। यूँ कहूँ कि शब्द अपनी कहानियाँ स्वयं बयां करते हैं, बस उन्हें सुनने की देर होती है। Accountability कोई नया शब्द नहीं है। भारतीय समाज ने सदैव इस विचार के डोर को मजबूती से थामे रखा है फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि आज भारत में इस डोर की पकड़ कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है? Accountability का अर्थ है उत्तरदायित्व एवं जवाबदेही। जवाबदेही अपने कर्मों की, जवाबदेही अपने दायित्वों की और जवाबदेही अपनी जिम्मेदारियों की। तो आखिर इस सरकार से इस जवाबदेही में कहाँ चूक हुई?
आइए कुछ प्रमुख घटनाओं का उल्लेख करके देखते हैं, जहाँ सरकार पर Accountability न लेने के आरोप लगाए जाते रहे हैं
- पिछले पाँच वर्षों में रेलवे में लगभग 200 बड़ी दुर्घटनाएँ हुई हैं। क्या रेल मंत्री ने इसकी जवाबदेही ली?
- आतंकवादी घटनाएँ, जैसे 2019 का पुलवामा हमला और 2025 का पहलगाम हमला। हालाँकि इन घटनाओं के बाद सरकार ने कार्रवाई की, पर क्या गृह मंत्री ने इसकी जवाबदेही ली?
- बीते वर्षों में 90 से अधिक पेपर लीक हुए। क्या शिक्षा मंत्री ने इसकी जवाबदेही ली?
- डॉलर के मुकाबले रुपये का गिरना और महँगाई इन दिनों काफी चर्चा में रही। क्या वित्त मंत्री ने इसकी जवाबदेही ली?
- ऑपरेशन सिंदूर में 13 जवानों की शहादत पर यह कहना कि कोई क्षति नहीं हुई, और उसके बाद लगातार जवानों के शहीद होने की खबरें सामने आना। क्या रक्षा मंत्री ने इसकी जवाबदेही ली?

बात केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की नहीं है। यह मांग जवाबदेही की है, जो इस सरकार ने कभी नहीं ली। यह प्रश्न है कि इतने बड़े लोकतांत्रिक देश में जवाबदेही क्यों नहीं है? यह आंदोलन केवल CJP बनाम BJP का नहीं है, यह केवल छात्रों का आंदोलन नहीं है, यह किसी राजनीतिक दल के लिए भी नहीं है। यह आंदोलन इस देश की जनता का है, जो अपनी सरकार से जवाबदेही की मांग कर रही है। रामायण, महाभारत तथा पुराण सभी धर्म और कर्म की बात करते हैं। पुराणों और श्रीमद्भगवद्गीता में भी उल्लेख मिलता है कि मनुष्य स्वयं अपने कर्मों का उत्तरदायी होता है और उसी के अनुसार उसे फल प्राप्त होता है। जो भारत अपनी भव्य संस्कृति का उदाहरण है और पूरे विश्व को अपनी संस्कृति की महानता बताता है, आज उसी भारत को अपनी संस्कृति और अपनी पहचान को बचाने के लिए जागना पड़ रहा है, जहाँ धर्म के अनुसार कर्म को ही सर्वोच्च माना गया है। Accountability की मांग करना इस लोकतांत्रिक देश में प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, क्योंकि भारत जैसे लोकतंत्र में जनता अपनी सरकार चुनती है और लोकतंत्र में जनता को सरकार से जवाबदेही मांगने का अधिकार होता है। यही किसी लोकतांत्रिक राष्ट्र की पहचान है। जिस दिन कोई सरकार अपनी जवाबदेही भूल जाती है, उसी दिन वह देश तानाशाही शासन की ओर बढ़ने लगता है। भारत, जिसकी जड़ें नैतिक मूल्यों और आचार-संहिता में गहराई तक समाई हुई हैं, ऐसे देश में केवल राजनीतिक जवाबदेही ही नहीं, बल्कि नैतिक जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इस देश की जनता अपने प्रतिनिधियों से नैतिक उत्तरदायित्व की भी अपेक्षा रखती है। कोई भी व्यक्ति किसी भी पद पर हो, उसकी यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने कर्मों का पूर्ण उत्तरदायित्व स्वीकार करे और अपने पद की गरिमा बनाए रखे।
भारत की अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए इस देश के प्रत्येक व्यक्ति को अपने राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए तथा नैतिक रूप से अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए, चाहे वह कोई भी व्यक्ति हो या किसी भी पद पर आसीन हो। इस देश में जब-जब जवाबदेही सवालों के घेरे में आएगी, तब-तब जनता इसी प्रकार लोकतांत्रिक विरोध और आंदोलनों के माध्यम से उसकी मांग करेगी और Accountability की मांग होती रहनी चाहिए।